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नोएडा में बड़ा बवाल: अधिवक्ता को घर से उठाकर लॉकअप में बंद करने का आरोप, 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड

कोर्ट परिसर में वकीलों का उग्र प्रदर्शन

🚨 नोएडा में बड़ा बवाल: अधिवक्ता को घर से उठाकर लॉकअप में बंद करने का आरोप, 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड — कोर्ट परिसर में वकीलों का उग्र प्रदर्शन ⚖️🔥

उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस और वकीलों के बीच टकराव का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पुलिस ने अधिवक्ता फरीद अहमद को उनके घर से उठाकर थाने ले जाकर लॉकअप में बंद कर दिया और उनके साथ मारपीट भी की गई। इस घटना के बाद पूरे अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश फैल गया और मामला तूल पकड़ता चला गया। 😡

जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता फरीद अहमद को कथित रूप से बिना उचित प्रक्रिया के घर से हिरासत में लिया गया। परिजनों और वकीलों का आरोप है कि उन्हें थाने में घंटों बंद रखा गया तथा शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। जब यह मामला बार एसोसिएशन और अन्य वकीलों तक पहुंचा तो उन्होंने इसे कानून का दुरुपयोग बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। ⚖️

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने प्रारंभिक जांच के बाद दारोगा श्रीपाल गिरी, कृष्ण कुमार सहित कुल चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। हालांकि अधिवक्ता समुदाय का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। 🚔

इसी मांग को लेकर आज कोर्ट परिसर में वकीलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकत्रित हुए और नारेबाजी करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने की मांग की। स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब कुछ पुलिसकर्मी कोर्ट परिसर पहुंचे। गुस्साए वकीलों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर दौड़ा भी लिया, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। 👨‍⚖️⚡

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हालात इतने बिगड़ गए कि सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके। वकीलों का कहना है कि यदि उनके साथी के साथ न्याय नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। वहीं पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। 🔍

यह घटना पुलिस-जन संबंधों और न्याय व्यवस्था के बीच संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और त्वरित निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है, ताकि कानून के प्रति जनता का विश्वास बना रहे। फिलहाल पूरे प्रदेश में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। ⚠️

✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – हलचल इंडिया न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर

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